मध्य प्रदेश में रबी सीजन की दो मुख्य फसलें हैं – गेहूं और चना। इन दोनों फसलों में सही उर्वरक प्रबंधन से पैदावार में बड़ा फर्क पड़ता है। कई किसान या तो ज्यादा खाद डाल देते हैं या गलत समय पर डालते हैं, जिससे पैसा भी बर्बाद होता है और पैदावार भी कम होती है।
इस लेख में हमने ICAR और मध्य प्रदेश कृषि विभाग की लेटेस्ट सिफारिशों के आधार पर 2026 के रबी सीजन के लिए पूरी उर्वरक अनुसूची दी है। साथ में बताया है कि खाद कब डालें, कैसे डालें, e-Token से कैसे बुक करें और किन गलतियों से बचें।
जरूरी बात:
नीचे दी गई मात्रा सामान्य सिफारिश है। सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी मिट्टी का परीक्षण (Soil Test) करवाएं और उसी के अनुसार खाद डालें।

1. गेहूं की उर्वरक अनुसूची 2026 (सिंचित फसल)
समय पर बुवाई के लिए अनुशंसित मात्रा (प्रति हेक्टेयर):
- नाइट्रोजन (N): 120 किग्रा
- फॉस्फोरस (P₂O₅): 60 किग्रा
- पोटाश (K₂O): 40 किग्रा
उर्वरक में बदलकर मात्रा:
| उर्वरक | मात्रा प्रति हेक्टेयर | मात्रा प्रति एकड़ (लगभग) |
|---|---|---|
| यूरिया | 260 किग्रा | 104-105 किग्रा |
| सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) | 375 किग्रा | 150 किग्रा |
| म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) | 67 किग्रा | 27 किग्रा |
DAP इस्तेमाल करने पर:
अगर आप SSP की जगह DAP इस्तेमाल करना चाहते हैं तो लगभग 130 किग्रा DAP + 67 किग्रा MOP + 40 किग्रा यूरिया (बुवाई के समय) डाल सकते हैं। बाकी यूरिया बाद में डालें।
गेहूं में खाद कब और कैसे डालें?
- बुवाई के समय (Basal Dose):
- पूरा फॉस्फोरस
- पूरा पोटाश
- 1/3 नाइट्रोजन (यानी लगभग 85-90 किग्रा यूरिया)
- खाद को बीज से 5-7 सेमी नीचे या साइड में डालें। बीज के साथ मिलाकर न डालें।
- पहली सिंचाई (क्राउन रूट इनिशिएशन – बुवाई के 20-25 दिन बाद):
- 1/3 नाइट्रोजन (लगभग 85-90 किग्रा यूरिया)
- दूसरी सिंचाई (टिलरिंग स्टेज – 40-45 दिन बाद):
- बाकी 1/3 नाइट्रोजन
लेट बुवाई (25 नवंबर के बाद):
N:P:K = 100:50:25 किग्रा प्रति हेक्टेयर रखें। यूरिया की मात्रा भी कम करें।
जिंक की कमी वाले क्षेत्रों में:
25 किग्रा जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर हर 2-3 साल में एक बार डालें।
2. चना (ग्राम) की उर्वरक अनुसूची 2026
चना लेग्यूम फसल है, इसलिए इसे ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती। मुख्य जरूरत फॉस्फोरस की होती है।
अनुशंसित मात्रा (प्रति हेक्टेयर):
- नाइट्रोजन (N): 20 किग्रा
- फॉस्फोरस (P₂O₅): 50-60 किग्रा
उर्वरक में बदलकर मात्रा:
| विकल्प | मात्रा प्रति हेक्टेयर | मात्रा प्रति एकड़ (लगभग) |
|---|---|---|
| DAP | 110-130 किग्रा | 45-52 किग्रा |
| SSP + यूरिया | SSP 310-375 किग्रा + यूरिया 40-45 किग्रा | SSP 125-150 किग्रा + यूरिया 16-18 किग्रा |
चना में खाद कब डालें?
पूरी मात्रा बुवाई के समय ही डालें। बाद में यूरिया डालने की जरूरत नहीं पड़ती।
बीज उपचार जरूर करें:
राइजोबियम कल्चर से बीज का उपचार करने से नाइट्रोजन फिक्सेशन बेहतर होता है और पैदावार बढ़ती है।
e-Token से खाद कैसे बुक करें? (2026 रबी सीजन)
- आधिकारिक वेबसाइट खोलें → evikas.mpkrishi.mp.gov.in
- आधार नंबर डालकर OTP से लॉगिन करें।
- Farmer ID और भूमि का विवरण चेक करें।
- फसल चुनें (गेहूं या चना) और क्षेत्र दर्ज करें।
- सिस्टम खाद की अनुमानित मात्रा दिखाएगा। जरूरत के अनुसार एडजस्ट करें।
- टोकन जनरेट करें।
- टोकन जनरेट होने के 3 दिनों के अंदर चयनित डीलर से खाद खरीद लें।.
कृषक ई-टोकन जनरेशन , e token mp krishi registration online (Urea, DAP, NPK)
किसान सबसे ज्यादा कौन-कौन सी गलतियां करते हैं?
- पूरी यूरिया बुवाई के समय डाल देना – इससे नुकसान होता है।
- मिट्टी परीक्षण न करवाना – गलत मात्रा डालने से पैसा बर्बाद होता है।
- DAP को SSP से बेहतर समझना – दोनों की अपनी जगह है। SSP सस्ता है और सल्फर भी देता है।
- खाद को बीज के साथ मिलाकर डालना – इससे अंकुरण खराब हो सकता है।
सही उर्वरक कैसे डालें? | 1 हेक्टेयर के लिए पूरी गाइड (ई-विकास + ICAR आधारित)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. गेहूं में यूरिया कितनी बार डालना चाहिए?
तीन बार – बुवाई, पहली सिंचाई और दूसरी सिंचाई पर।
Q2. चना में DAP बेहतर है या SSP?
दोनों सही हैं। बजट कम हो तो SSP + थोड़ा यूरिया इस्तेमाल करें।
Q3. चना में बाद में यूरिया डाल सकते हैं क्या?
नहीं। चना अपनी नाइट्रोजन खुद बना लेता है।
Q4. जिंक कब डालें?
मिट्टी परीक्षण में कमी आने पर या हर 2-3 साल में एक बार।
Q5. e-Token में खाद की मात्रा कैसे तय होती है?
आपकी भूमि और फसल के आधार पर सिस्टम खुद सुझाता है। आप बदल भी सकते हैं।
Q6. क्या एक ही टोकन में गेहूं और चना दोनों की खाद बुक कर सकते हैं?
हां, लेकिन अलग-अलग फसल के लिए अलग टोकन बनाना बेहतर रहता है।
निष्कर्ष
2026 के रबी सीजन में गेहूं और चना की सही उर्वरक अनुसूची अपनाकर आप अच्छी पैदावार ले सकते हैं। ऊपर दी गई जानकारी ICAR और मध्य प्रदेश कृषि विभाग की सिफारिशों पर आधारित है।
सबसे महत्वपूर्ण बात – मिट्टी परीक्षण करवाएं और e-Token सिस्टम का सही इस्तेमाल करें।
अगर आपके जिले या मिट्टी के हिसाब से और डिटेल चाहिए तो कमेंट में बताएं। हम अपडेट कर देंगे।
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